क्या Chatbot को 'मैं' कहने का हक है?

मूल शीर्षक: Maybe Chatbots Shouldn’t Get to Say ‘I’ or ‘Me’

यह क्यों महत्वपूर्ण है

Chatbot के भावनात्मक उपयोग और मानसिक स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव को लेकर नीतिगत बहस तेज़ हो सकती है।

MIT प्रोफेसर Sherry Turkle की नई पुस्तक 'Artificial Intimacy' में चेतावनी: Chatbot का प्रथम-पुरुष उपयोग ('I', 'Me') मानवीय संबंधों और मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।

MIT की प्रोफेसर Sherry Turkle ने चार दशकों तक मानव-कंप्यूटर संपर्क का अध्ययन किया है। उनकी नई पुस्तक 'Artificial Intimacy: Who We Become When We Talk to Machines' एक सीधी चेतावनी है — AI Chatbot पर बढ़ती निर्भरता मानवता के लिए आपातकाल की स्थिति बना रही है।

Turkle के अनुसार, महामारी के दौरान किए गए साक्षात्कारों में उन्होंने पाया कि लोग परिवार की पीड़ा को नज़रअंदाज़ कर Chatbot से बात करना पसंद कर रहे थे। उन्होंने Wired को बताया कि लोग राजनीति या वास्तविक जीवन से कट रहे हैं क्योंकि वे 'Chatbot-land' में जीना चाहते हैं।

Turkle ने Chatbot के प्रथम-पुरुष ('I', 'Me') उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की वकालत की। उनका तर्क है कि LLM की 'पूर्ण स्वीकृति' — जो कभी असहमत नहीं होती — एक खतरनाक भ्रम पैदा करती है। Chatbot को मनोचिकित्सा का विकल्प बताना और 'Human in the Loop' जैसी शब्दावली को वे सीधे धोखा मानती हैं। उनके अनुसार, इस शब्द का अर्थ है कि इंसान को उत्पादन प्रक्रिया से बाहर कर केवल AI की गलतियाँ सुधारने के लिए रखा गया है — और इतने कम लोगों से यह काम ठीक से हो भी नहीं सकता।

पुस्तक की तुलना 'Silent Spring' और 'Unsafe at Any Speed' जैसी जन-जागरण रचनाओं से की जा रही है।

स्रोत

wired.com — मूल लेख पढ़ें →