Trump의 AI改名令、Tech幹部の忠誠テストに
मूल शीर्षक: Trump’s Crazy AI Rebrand Was a Loyalty Test for Tech Execs—and It Worked
यह क्यों महत्वपूर्ण है
सरकारी नामकरण नीति AI उद्योग की वैश्विक पहचान और नियामक ढांचे को प्रभावित कर सकती है।
2026年10月、Trump大統領は白宮में शीर्ष AI नेताओं के साथ लंच के दौरान executive order जारी किया, जिसमें 'artificial intelligence' शब्द को सरकारी दस्तावेज़ों से हटाकर 'Super Intelligence' रखने का निर्देश दिया। Jeff Bezos, Jensen Huang, Dario Amodei, Mark Zuckerberg सहित किसी ने भी आपत्ति नहीं जताई।
70 साल पहले Dartmouth College में John McCarthy ने 'artificial intelligence' शब्द गढ़ा था। आज Google Scholar पर इस टर्म के 74 लाख से अधिक परिणाम मिलते हैं। यह शब्द दुनियाभर में इतना प्रचलित है कि इसे बदलने की कल्पना भी बेतुकी लगती है।
फिर भी, 23 सितंबर 2026 को United Nations में भाषण के दौरान Trump ने संकेत दिया कि वे इस शब्द को पसंद नहीं करते। इसके बाद White House लंच में उन्होंने executive order के ज़रिए 'artificial intelligence' को प्रतिबंधित कर दिया और इसकी जगह 'Super Intelligence' शब्द अपनाने का आदेश दिया।
इस बैठक में Jeff Bezos, Jensen Huang, Dario Amodei, Mark Zuckerberg, Sundar Pichai, Greg Brockman, Alex Karp और Elon Musk मौजूद थे। WIRED की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से किसी ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई।
'Profiles in Cowardice' पुस्तक के लेखक Jacob Weisberg ने इसे Trump का 'loyalty test' बताया। उनका कहना है कि अगर ये सभी मिलकर name change को अस्वीकार करते, तो Trump कुछ नहीं कर सकते थे। लेकिन सामूहिक चुप्पी के कारण Trump यह दावा कर सकते हैं कि इन नेताओं ने उनके फैसले का समर्थन किया।
Wired के अनुसार यह महज़ शब्द बदलने का मामला नहीं है — AI उद्योग के नेताओं के लिए यह टर्म उनकी पहचान और नींव है। इसके बावजूद अरबों डॉलर की संपत्ति रखने वाले ये CEO बिना एक शब्द बोले झुक गए।