サイボーグゴキブリが命を救う?災害救助に新技術
मूल शीर्षक: These Cyborg Cockroaches Could Save Your Life
यह क्यों महत्वपूर्ण है
आपदा प्रबंधन में कीट-आधारित साइबोर्ग तकनीक खोज और प्राथमिक चिकित्सा दोनों को एक साथ संभव बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
क्वींसलैंड विश्वविद्यालय और UNSW के शोधकर्ताओं ने जीवित तिलचट्टों में इलेक्ट्रोड और माइक्रोचिप लगाकर 'Paraborg' विकसित किया है, जो दूर से नियंत्रित होकर आपदा पीड़ितों की खोज और प्राथमिक चिकित्सा दे सकता है। यह शोध पत्रिका Advanced Science में प्रकाशित हुआ है।
ऑस्ट्रेलिया के University of Queensland (UQ) और University of New South Wales (UNSW) के शोधकर्ताओं ने 'Paraborg' नामक साइबोर्ग तिलचट्टा विकसित किया है। इसके लिए उन्होंने उत्तरी क्वींसलैंड में पाए जाने वाले विशालकाय बिल खोदने वाले तिलचट्टे का उपयोग किया, जो 87 मिलीमीटर लंबे और 40 ग्राम वजनी होते हैं।
शोध दल ने दो प्रकार के Paraborg तैयार किए: एक कैमरे से लैस जो पीड़ितों की स्थिति रिकॉर्ड करे, और दूसरा स्वचालित इंजेक्शन तंत्र से युक्त जो दवा दे सके। इंजेक्शन तंत्र से तिलचट्टे की ऊंचाई लगभग 15 मिलीमीटर और वजन लगभग 17 ग्राम बढ़ा, लेकिन उसकी सामान्य गति पर कोई उल्लेखनीय असर नहीं पड़ा।
तिलचट्टों के एंटीना और सेर्सी (पेट के पीछे के संवेदी अंग) में इलेक्ट्रोड लगाकर शोधकर्ता दिशा और चाल को दूर से नियंत्रित कर सके। 10 से 40 हर्ट्ज की विद्युत आवृत्ति प्रभावी रही, जबकि 50 हर्ट्ज से अधिक आवृत्ति समय के साथ अप्रभावी हो गई।
इंजेक्शन तंत्र में साइट्रिक एसिड और बेकिंग सोडा की रासायनिक प्रतिक्रिया से उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड सिरिंज को सक्रिय करती है। परीक्षण में Paraborg ने तीन चेकपॉइंट से गुजरते हुए लक्ष्य को सफलतापूर्वक इंजेक्शन दिया। UQ के बायो-रोबोटिक्स शोधकर्ता Tan Vo Doan ने कहा, 'हम साइबोर्ग कीड़ों को खोज से आगे ले जाना चाहते थे।'