Aphantasiaが想像力の脳科学を塗り替える

मूल शीर्षक: People who can't picture anything are rewriting the science of imagination

यह क्यों महत्वपूर्ण है

कल्पना की नई बहु-क्षेत्रीय समझ AI imagination models और mental health research दोनों के लिए नई दिशा खोल सकती है।

Consciousness and Cognition जर्नल में प्रकाशित एक नई समीक्षा में Derek Arnold, Loren Bouyer, Blake Saurels और Samuel Schwarzkopf ने तर्क दिया है कि मानसिक कल्पना 'उल्टे देखने' की प्रक्रिया नहीं है। Aphantasia से पीड़ित लोग और primary visual cortex नष्ट हो जाने के बावजूद कल्पना कर सकने वाले मरीज़ यह साबित करते हैं कि कल्पना में कई brain regions मिलकर काम करते हैं।

कुछ लोग जन्म से मन में कोई दृश्य नहीं बना पाते। इस स्थिति को Aphantasia कहा जाता है — ग्रीक शब्द 'phantasia' से, जिसका अर्थ है इंद्रियों से प्राप्त जानकारी। यह सिर्फ दृश्यों तक सीमित नहीं; अक्सर आवाज़, गंध, स्वाद और स्पर्श की कल्पना भी नहीं होती।

वर्षों से प्रचलित थ्योरी — जिसे 2019 में Joel Pearson ने विस्तार दिया — यह थी कि कल्पना दरअसल 'देखने की उल्टी प्रक्रिया' है। इसमें मान्यता थी कि सोचते वक्त brain के सामने वाले हिस्से से संकेत निकलता है, स्मृति क्षेत्र विवरण भरते हैं, और चित्र primary visual cortex — मस्तिष्क के पिछले हिस्से — पर 'बनता' है, ठीक वैसे जैसे आंखों से देखते समय होता है।

नई समीक्षा इस धारणा को सीधे चुनौती देती है। शोधकर्ताओं ने ऐसे मरीज़ों के मामले उठाए जिनका primary visual cortex पूरी तरह नष्ट हो गया था — फिर भी वे आंखें बंद करके किसी चेहरे या कमरे की मानसिक तस्वीर बना सकते थे। अगर कल्पना सच में उसी 'स्क्रीन' पर निर्भर होती, तो यह संभव नहीं होता।

Arnold और उनके सहयोगियों का कहना है कि brain scanner में primary visual cortex की गतिविधि देखकर यह मान लेना कि वही चित्र बनाता है — correlation को causation समझने की गलती है। उनके अनुसार असली तस्वीर यह है: मानसिक कल्पना front से sides तक फैले कई brain regions के सामूहिक प्रयास से बनती है। जब यह 'टीमवर्क' टूटता है, तो Aphantasia जैसी स्थिति उत्पन्न होती है।

खास बात यह है कि समीक्षा के दो लेखक खुद Aphantasia से पीड़ित हैं, जो इस शोध को एक अनोखी भीतरी दृष्टि देता है। निष्कर्ष यह भी बताते हैं कि यह network कई तरीकों से टूट सकता है — इसीलिए हर इंसान की 'भीतरी दुनिया' थोड़ी अलग होती है।

स्रोत

dailyneuron.com — मूल लेख पढ़ें →