कंपाइलर लिखना चाहते हैं? बस ये दो पेपर पढ़ें
मूल शीर्षक: Want to Write a Compiler? Just Read These Two Papers (2008)
यह क्यों महत्वपूर्ण है
कंपाइलर development को सरल बनाने से नए developers को प्रोग्रामिंग भाषाएँ बनाने में मदद मिलती है।
2008 का ब्लॉग पोस्ट बताता है कि कंपाइलर लिखना कठिन नहीं है। Jack Crenshaw की 'Let's Build a Compiler!' सीरीज़ और Sarkar, Waddell, Dybvig का 'A Nanopass Framework' पेपर को पढ़कर आसानी से कंपाइलर बना सकते हैं।
James Hague के इस ब्लॉग पोस्ट में कंपाइलर लिखने की मिथक को तोड़ा गया है। अधिकांश कंपाइलर की किताबें बहुत व्यापक और जटिल होती हैं, जिससे लोग सोचते हैं कि कंपाइलर लिखना कठिन है। लेकिन Jack Crenshaw की 1988 की सीरीज़ 'Let's Build a Compiler!' इस धारणा को बदलती है। यह single pass, parsing और code generation को मिलाकर Turbo Pascal जैसे कंपाइलर बनाने पर फोकस करती है। मूल ट्यूटोरियल Pascal में लिखे गए थे, लेकिन C और Forth versions भी उपलब्ध हैं। Crenshaw की सीरीज़ की एक कमी है - इसमें abstract syntax tree नहीं है। दूसरा महत्वपूर्ण resource Sarkar, Waddell, और Dybvig का 'A Nanopass Framework for Compiler Education' पेपर है। यह concept बताता है कि कंपाइलर केवल program के internal representation के transformations की श्रृंखला है। authors सैकड़ों simple compiler passes का उपयोग करने को promote करते हैं।