Google DeepMind: LLM कभी चेतन नहीं होगा
मूल शीर्षक: Google DeepMind Paper Argues LLMs Will Never Be Conscious | Philosophers said the paper’s argument is sound, but that “all these arguments have been presented years and years ago.”
यह क्यों महत्वपूर्ण है
AI कंपनियों की AGI दावों पर सवाल उठाता है और चेतना की वैज्ञानिक समझ प्रदान करता है।
Google DeepMind के वरिष्ठ वैज्ञानिक Alexander Lerchner का पेपर तर्क देता है कि कोई भी AI या कम्प्यूटेशनल सिस्टम कभी चेतन नहीं बन सकता। दर्शनशास्त्रियों का कहना है कि तर्क सही है लेकिन ये बातें दशकों से कही जा रही हैं।
Google DeepMind के वरिष्ठ स्टाफ साइंटिस्ट Alexander Lerchner ने अपने पेपर 'The Abstraction Fallacy: Why AI Can Simulate But Not Instantiate Consciousness' में दावा किया है कि कोई AI सिस्टम कभी चेतन नहीं बन सकता। यह तर्क AI कंपनी CEOs की AGI संबंधी भविष्यवाणियों से टकराता है। DeepMind के CEO Demis Hassabis ने हाल ही में दावा किया था कि AGI 'औद्योगिक क्रांति से 10 गुना प्रभाव डालेगा और 10 गुना तेजी से होगा।' Lerchner का तर्क है कि AI सिस्टम 'mapmaker-dependent' हैं और इन्हें डेटा व्यवस्थित करने के लिए मानव चेतना की आवश्यकता होती है। विकासवादी जीवविज्ञानी Johannes Jäger के अनुसार, चेतना के लिए भौतिक शरीर आवश्यक है जो जीवित रहने के लिए निरंतर कार्य करता है। LLM केवल हार्ड ड्राइव पर पैटर्न हैं। Goldsmiths University के Mark Bishop ने कहा कि ये तर्क दशकों पुराने हैं।